sirat
Monday, January 4, 2010
न दव तने दगो न तारा थी दूर थाव
रटन मुजाहिद नु रटु एटली मुदत आपजे ।
लाग्या करे छे डर तारो मुजाहिद मने दरतो कायम राखजे ,
चाले हसन इशारे तारा ने बस तने गमे अटलु आपजे ।
होई भले बधू खाली बस आखोमा आंसू ,
नाम साम्भली हुसैन नु रडी पड़ाऐ अटलु आपजे .
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