sirat
Wednesday, December 30, 2009
"हसन" कहे
छे कोन के युद्धमा युवानो ज जंग लड़ी सके ,
अली असगर जेवा बालको य
हुरमला
ने
पसीनो
पडावी सके .
लखाई गई हजारो दास्तानों, आ जग मही।
विजेता एक तो बताओ हुसैन जेवा ,जग मही.
काफी छे हुसैननु नाम ज दरेक जग्याए ,
चाले छे ऐ
नाम ना
सिक्का दरेक जग्याए .
Monday, November 23, 2009
लखु हु शब्दों अदधा मारी हद त्या सूधी,
खूटे छे शब्दों तारीफ माटे जाऊ क्या सूधी .
Wednesday, October 21, 2009
sirat pe teri.....
तेरे दर्पे आना मेरा , मर्जी थी तेरी ,
में क्या था सिवा तेरे ,मर्जी थी तेरी.
Newer Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)